अगर तू न होती तो क्या होता,
दो चार दिनों बाद बीमार होता।
तू ही है जो देती है सहारा ,
चलने फिरने और कुछ कर जाने का।
तेरे लिए ही सब है परेसान,
नहीं तो कोई बन न पाता इन्सान।
अगर तू न होती तो क्या होता,
दो चार दिनों बाद बीमार होता।।
तेरे लिए सब कुछ कर जाता ,
न जाने किस-किस से लड़ लेता।
अगर तू न होती तो क्या होता,
दो चार दिनो बाद बीमार होता।।।
संजय सिंह
दो चार दिनों बाद बीमार होता।
तू ही है जो देती है सहारा ,
चलने फिरने और कुछ कर जाने का।
तेरे लिए ही सब है परेसान,
नहीं तो कोई बन न पाता इन्सान।
अगर तू न होती तो क्या होता,
दो चार दिनों बाद बीमार होता।।
तेरे लिए सब कुछ कर जाता ,
न जाने किस-किस से लड़ लेता।
अगर तू न होती तो क्या होता,
दो चार दिनो बाद बीमार होता।।।
संजय सिंह
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